रात 3 बजे का 'अदृश्य' हैकर
बिना OTP शेयर किए कैसे खाली हो रहे थे शहर के बड़े व्यापारियों के खाते?
कुछ महीनों पहले शहर के कई नामी व्यापारियों में एक अजीब सा खौफ फैल गया था। हर रात ठीक 3 से 4 बजे के बीच, किसी न किसी व्यापारी के बैंक खाते से लाखों रुपये उड़ जाते थे। सबसे रहस्यमयी बात यह थी कि पीड़ितों के मोबाइल पर न तो कोई लिंक आया था, न ही उन्होंने किसी को अपना ओटीपी (OTP) शेयर किया था। पुलिस और बैंक अधिकारी भी हैरान थे कि आखिर बिना किसी परमिशन के यह 'अदृश्य' हैकर खातों में सेंध कैसे लगा रहा है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए जब साइबर सेल (Cyber Cell) ने जांच शुरू की, तो एक चौंकाने वाला पैटर्न सामने आया। जिन भी लोगों के पैसे कटे थे, वे सभी शहर के एक मशहूर और महंगे कैफे में नियमित रूप से जाते थे। पुलिस ने सादे कपड़ों में कैफे की निगरानी शुरू की और वहां फ्री पब्लिक वाई-फाई (Public Wi-Fi) के नेटवर्क को स्कैन किया। पता चला कि कोई उसी नेटवर्क के ज़रिए वहां बैठे लोगों के फोन का डेटा 'क्लोन' (Clone) कर रहा था।
जब पुलिस ने जाल बिछाया, तो पता चला कि यह 'अदृश्य हैकर' कोई अंतरराष्ट्रीय गिरोह नहीं, बल्कि उसी कैफे के कोने में बैठकर रोज़ाना कॉफी पीने वाला 19 साल का एक स्थानीय कॉलेज स्टूडेंट था। वह फ्री वाई-फाई राउटर को हैक करके बड़े व्यापारियों के फोन का एक्सेस ले लेता था और रात को सोते समय उनके फोन से ट्रांज़ेक्शन अप्रूव कर देता था। इस हाई-टेक साइबर थ्रिलर ने पूरे शहर को सिखा दिया कि मुफ्त वाई-फाई का लालच कितना भारी पड़ सकता है।

